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सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

न्यायिक क्षेत्र में आई टी का उपयोग


कल परसों ही हमारे कोर्ट को पहले कोर्ट ( जिला न्यायालयों में ) शुरू करने की उपलब्धि हासिल हुई इससेपहले ऐसी ही उपलब्धि दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी अर्जित की थी पिछले एक दशक में जिस तरह से सूचनाविज्ञान का उपयोग न्यायिक क्षेत्र में बढा है वो अपने आप में एक बहुत बडी बात है अदालतों में पूर्णत: कंप्यूटरीकरण की प्रक्रिया, सभी अदालती कार्यवाहियों को प्रतिदिन इंटरनेट पर उपलब्ध कराना , इतना ही नहीं सभी अदालती आदेशों और फ़ैसलों को नियमित रूप से , बल्कि अब तो पिछले पचास वर्षों में हुए सभी फ़ैसलों कोभी उपलब्ध करने जैसे सभी काम बखूबी हो चुके हैं इनके अलावा वीडियो कांन्फ़्रेंसिग से मुकदमों की सुनवाई , और अब ये कोर्ट कुल मिला कर ये कहा जा सकता है कि आधुनिक युग में उपलब्ध सभी सूचना तंत्रों काउपयोग और सहायता न्यायिक स्तंभ को लैस करने के लिए किया जा रहा है
अपने कार्यकाल में मैंने ये बदलाव होते हुए देखे हैं और सच कहूं तो बखूबी इसका फ़र्क भी महसूस किया है , मगरजब पाले के दूसरी तरफ़ जाके एक आम आदमी की तरह देखता हूं तो सोचता हूं ,ये विश्लेषण करता हूं कि क्यावाकई सूचना तकनीक ने आम आदमी को उसके न्याय पाने में थोडी बहुत सहायती की है मुझे लगता है कि कुछया बहुत सीमित फ़ायदा वो भी अप्रत्यक्ष रूप से हो पाया है अन्यथा ...इन तकनीकों का मुकदमों के तीव्रनिष्पादन से कोई प्रत्यक्ष संबंध मुझे तो नहीं दिखा

जब मैंने अपनी नौकरी शुरू की थी तो अदालतों में सारा कामकाज टाईपराईटर द्वारा ही किया जाता था , औरजाहिर सी बात है कि कंप्यूटर के मुकाबले उसकी क्षमता और परिणाम बहुत ही कम था मगर कंप्यूटर आने से बेशक अदालती कर्मचारियों मतलब , रिकार्ड रखने वाले कर्मचारियों तथा अदालती कार्यवाहियों को दर्ज़ करने वालेआशुलिपिकों की रफ़्तार और गुणवत्ता में बहुत ही क्रांतिकारी परिवर्तन आया मगर एक आम आदमी जो न्यायकी तलाश में सालों साल अदालत के चक्कर काटता है उसे इन परिवर्तनों का कितना फ़ायदा पहुंचा ...इसमें खुदमुझे ही संदेह होता है हां उच्च एवम उच्चतम न्यायालयों के आदेशों की उपलब्धता ने न्यायाधीशों को मुकदमों केनिष्पादन और सामयिक न्याय करने में जरूर ही सहायता पहुंचाई होगी हालांकि अभी तो ये न्यायिक क्षेत्र कोतकनीक सबल करने की प्रक्रिया चल रही है इसलिए अभी ही इसकी सफ़लता विफ़लता का आकलन करना शायदथोडी जल्दबाजी होगी और इसे अभी समय देने की जरूरत है , लेकिन इसके बावजूद मुझे लगता है कि इन उपायोंऔर प्रयासों से बेहतर है कि नई अदालतों के गठन पर ....और उनकी बहुतायत पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाए तोज्यादा सार्थक परिणाम आएंगे इसके अलावा ...प्ली बारगेनिंग , मध्यस्थता केंद्रों , लोक अदालतों , और कानूनी जागरूकता शिविरों जैसे प्रयासों को भी बढावा दिया जाए तो बेहतर होगा

अगली कडियों में देखेंगे कि ...कुछ तकनीक जो जाने किन कारणों से विफ़ल हो रही हैं और कुछ तकनीक जिनकाउपयोग क्रांति ला सकता है
...

2 टिप्‍पणियां:

  1. फ़र्क तो होना ही था,आई. टी. का समुचित उपयोग न्याय के साथ साथ बहुत सारी प्रणालियों में सुधार लाएगा..

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  2. बढिया जानकारीं रही अजय भईया ।

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