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सोमवार, 29 जून 2009

जानिए विवाह से सम्बंधित कुछ अपराधों को ..

आज के अंक में जानते हैं की भारतीय कानून में विवाह से सम्बंधित भी कुछ अपराध वर्णित हैं...वो कौन कौन से हैं..किस तरह के हैं और उनमें कितनी सजा का प्रावधान है..आदि आदि...

भारतीय दंड संहिता की धारा ४९३ के अनुसार कोई भी व्यक्ति, किसी भी महिला से , जो की कानूनी रूप से उसकी पत्नी नहीं है, मगर समझती है की वो उस व्यक्ति की विवाहिता है, यदि , उस महिला के संसर्ग में (शारीरिक रिश्ते ) आता है तो वो दंड का भागी बँटा है , क्यूंकि ये कानूनन जुर्म है. इस धारा के अनुसार दो तथ्यों की अपरिहार्यता होती है..

.पहली ये की कानूनन वैध शादी का धोखा होना .
.और दूसरा इस धोखे में ही संसर्ग होना.

इस जुर्म के लिए सिद्ध ये करना होग की आरोपी व्यक्ति ने उस महिला को jaanboojh कर उसे इस धोखे में रखा की वो कानून उसकी वैध पत्नी है ...और इसी विश्वास के तहत ही उसके साथ संसर्ग स्थापित किया गया

ये अपराध .गैर संज्ञेय, गैर जमानती तथा non कम्पौंदेबल है..और कानून के अनुसार इसमें दस वर्षों की सजा और जुर्माने का प्रावधान है

बहु-विवाह :-

भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के अनुसार कोई भी व्यक्ति यदि अपने jivan साथी के जीवित होते हुए दूसरा विवाह kartaa है तो उसे बहु विवाह का दोषी माना जाएगा. इस अपराध के लिए उसे सात वर्षों की सजा हो सकती है. मगर इस कानून से जुड़े कुछ महतवपूर्ण तथ्यों का जिक्र आवश्यक हो जाता है.. ये कानून मुस्लिम धर्म के अनुयायीं(सिर्फ पुरुषों ) पर लागु नहीं होता क्यंकि शरीयत काननों के अनुसार उन्हें इसकी इजाजत मिली हुई है, is कानून के बावजूद दो स्थितियों में ये अपराध नहीं माना जाएगा.

यदि किसी न्यायालय द्वारा उस विवाह को कानूनी मान्यता दे दी है....

उस स्थिति में भी जब पहले पति या पहली पत्नी का ,,..सात वर्षों तक कोई अता -पता न चले..

सबसे महत्वपूर्ण बात ये की ,,कानून की नजर में दूसरी पत्नी और doosre पति को..भी वो सारे अधिकार प्राप्त हैं तो...बशर्ते की विवाह वैध हो .(.वैध और अवैध/अपूर्ण विवाह पर चर्चा फिर कभी )

कल बात करेंगे ..धरा ४९८ की जो इन दिनों दुरूपयोग किये जाने की शिकायत के कारण चर्चा में है.

4 टिप्‍पणियां:

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