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बुधवार, 24 जून 2009

दुर्घटना क्लेम करना हो तो -भाग दो

कल से आगे.....

दावाकार या वादी स्वयं पीड़ित व्यक्ति ही होता है तो पंचाट उसी की गवाही , उसी के द्वारा उपलब्ध साक्ष्य एवं कागजातों को आधार मानकर दावे का निपटारा करता है. ऐसे दावों में पंचाट पीड़ित व्यक्ति को चार विभिन्न मदों में भुगतान करने का आदेश प्रतिवादी को देती है. इलाज, यात्रा भत्ता, पोषाहार देतु तथा प्रभावित दिवसों में हुए आय का नुकसान .इसलिए पीड़ित व्यक्ति को चाहिए वो इलाज से सम्बंधित प्रत्येक कागज़ .दवाइयों की रसीद,अस्पताल आने जाने,रहने में लगे खर्चे की रसीदें तथा तथा पोषाहार हेतु लिए गए विशेष भोज्य पदार्थों पर हुए खर्च का सारा ब्यौरा संभाल कर रखे एवं गवाही के समय अदालत में उपस्थित करे.

दूसरी स्थिति में जब दुर्घटना में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसके वैध आश्रित/उत्तराधिकारी द्वारा दुर्घटना क्लेम करने में पंचाट कुछ विशेष बातों का ध्यान रखती है. सबसे पहली तो ये की दावा करने वाला मृतक का वैध आश्रित/उत्तराधिकारी है. ये दोनों बातें यानि मृतक से दवाकार का सम्बन्ध तथा वैध उत्तराधिकारी/आश्रित होने का प्रमाण , दोनों ही दावा करने वाले व्यक्ति को पंचाट में saabit karnee hotee है. यानि पंचाट को संतुष्ट करना होता है. मृत व्यक्ति वाले दावों में भी पंचाट कुछ विशेष मदों में मुआवजा राशिः भुगतान का आदेश देती है. मृतक के अंतिम संस्कार पर किये गए खर्च जो की सामान्यतया दो हजार रुपया दिया जाता है. मृतक के परिवारवालों को हुई मानसिक परेशानी एवं आघात के मद में जो की सामान्यतया पच्चीस हजार रुपये होता है. तथा तीसरा एवं सबसे अहम् मृतक के परिवार को उस मृतक के चले जाने से हुई आर्थिक हानि.
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यहाँ ये बता दें की आर्थिक हानि हेतु पीड़ित या मृत व्यक्ति की आयु, uskee मासिक आय, रहन सहन पर किया जा रहा खर्च आदि सभी तथ्यों का गणितीय विश्लेषण करने के उपरांत ही मुआवजा राशिः तय की जाती है. एक अहम् बात मृतक से सम्बंधित दावे में पंचाट अंतरिम मुआवजा का आदेश भी देती है. ऐसा ही अंतरिम मुआवजा उस दुर्घटना क्लेम में भी दिया जाता है jismein पीड़ित व्यक्ति को मान्यताप्राप्त मेडिकल बोर्ड द्वारा स्थाई अपंगता का प्रमाणपत्र दिया गया है. हाँ , इसमें मुआवजे की राशि इसमें आम तौर पर पच्चीस हज़ार ही होती है.

पंचाट द्वारा मुआवजे राशि का भुगतान का आदेश भी एक विशेष व्यवस्था द्वारा किया जाता है. सामान्यतया कुल देय राशिः का अधिकतम बीस से पच्चीस प्रतिशत ही आदेश के तुंरत बाद भुगतान किया जाता है . शेष राशिः को पंचाट के आदेशानुसार नामित व्यक्तियों के नाम से बैंक में फिक्स दीपोजित करा दिया जाता है जो परिपक्वता के बाद उन्हें मिलता है. किसी अनिवार्य परिस्थिति में उक्त राशि को जारी करने हेतु प्रार्थनापत्र पंचाट में लगाया जा सकता है.

इसके अलावा कुछ और बातें भी ध्यान देने योग्य हैं. यदि दुर्घटना के समय चालाक के पास उक्त वाहन को चलाने का वैध लाईसेंस नहीं है तो मुआवजे के भुगतान का सारा jimma वाहन के मालिक के ऊपर पड़ जाता है . ऐसा इसलिए क्योंकि इससे इंश्योरेंस की शर्तों का उल्लंघन होता है. ऐसी दुर्घटनाएं जिनमें चश्मदीद गवाह नहीं होते उनमें १६३ (क ) के तहत कार्यवाई आगे बधाई जाती है. यानि कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है की एक विशेष कार्य पधात्ति के बावजूद मुआवजे की राशि बहुत कुछ वादी की स्थिति, आयु, और आय पर निर्भर करती है....

नोट :- मेरा ये आलेख दैनिक ट्रिब्यून के स्तम्भ कानून -कचहरी में प्रकाशित हो चूका है..एवं ये वादी के हितों को ध्यान में रख कर जानकारी हेतु लिखा गया था......किसी प्रश्न या शंका हेतु ..आप यहाँ पूछ सकते हैं......

3 टिप्‍पणियां:

  1. इतनी सुन्दर जानकारी के लिए आभार.

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  2. बात बताने में बहुत उम्दा जानकारी दे गये. बहुत आभार भाई.

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