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शनिवार, 6 जून 2009

जल्द ही सभी थाने सीधे जुडेंगे अदालतों से .



जैसा कि मैं अपनी पिछली पोस्टों में बता चुका हूँ कि अदालती सुधारों की जारी प्रक्रिया में अदालतों को पुर्णतः कम्प्युटरीकृत करने की योजना पर पिछले कुछ वर्षों से काम चल रह है. राजधानी की जिला अदालतों में तो इसका सकारात्मक परिणाम दिखने भी लगा है..इसके तहत सभी पुराने मुकदमों के रेकोर्ड को कंप्यूटर पर दर्ज किया जा चुका है और ये प्रक्रिया नियमित रूप से अभी भी चल रही है.
ग्रीष्म कालीन अवकाश में इस कार्य के लिए विशेष रूप से कमचारियों की dyuti लगाई जा रही है. इसका परिणाम ये निकला है कि पहले जिस जानकारी के लिए आम लोगों को घंटों चक्कर लगाने पड़ते थे... कर्मचारिओं की चिरौरी करनी पड़ती थी..वो अब चंद मिनटों में पूछताछ कार्यालय में कंप्यूटर की मदद से पता चल जाती है....

इसी क्रम को आगे बढाते हुए एक और महत्वाकांक्षी योजना को अमली जामा पहनाने का काम शुरू हो चुका है. सूत्रों की माने तो जल्दी ही राजधानी के सभी थानों के कम्प्यूटरों को अदालत के कम्प्यूटरों से सीधे जोड़ने की योजना का कार्यरूप तैयार किया जा रहा है. दरअसल इसकेपीछे उद्देश्य ये है कि जब भी कोई प्राथमिकी दर्ज होती है तो उसकी सूचना अदालत तक आते आते काफी देर हो जाते है, जबकि जमानत के आवेदन के लिए, तथा दुर्घटना क्लेम के मुकदमों के लिए प्राथमिकी की प्रति का होना अनिवार्य जैसा होता है. मौजूदा कानून के अनुसार प्राथमिकी की प्रति या तो थाने में होती है या फिर एक प्रति शिकायतकर्ता के पास होती है. कई बार तो किसी को अग्रिम जमानत का आवेदन करते समय ये भी पता नहीं होता कि प्राथमिकी में उसे नामजद किया गया है या नहीं.
हलाँकि अभी इस योजना की तकनीकी पक्षों और वैधानिक पहलुओं पर अध्यन चल रहा है, और दिल्ली पुलिस अन्य बहुत सी बातों पर काम कर रही है. मगर सूत्र बताते हैं कि यदि सब कुछ ठीक रहा याने योजना के अनुरूप हुआ तो जल्दी ही प्राथमिकी की प्रति के लिए थाने के चक्कर काटने का मोहताज नहीं रहेगा.

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छी जानकारी दी है आपने, धन्यवाद

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  2. mujhe is baare me pata hi nahi tha...aapke dwara ye jaankaari mili...isse nyaay vyavastha me jaroor sudhaar hoga.

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  3. बहुत अच्छी बात है...हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ही तरह..अगले चरण में, निचली अदालतों के आदेश और cause list भी इन्टरनेट पर उपलब्ध होने चाहिए.

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  4. आदरणीय काजल कुमार जी..राजधानी की जिला अदालतों की कुज लिस्ट एवं आदेश..नियमित रूप से इन्टरनेट पर उपलब्ध कराये जाते हैं..अन्य जगहों का तो पता नहीं...

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