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रविवार, 1 फ़रवरी 2015

हां ! अब बदलने का समय आ गया है ..............







इन दिनों एक अजीब ही माहौल बना हुआ देश का , कहा जाए कि पूरा देश ही परिवर्तम मोड में है , मुझे लगता है कि यही वो समय है जब समाज के हर तबके , हर वर्ग , हर क्षेत्र से उन चुनिंदा लोगों को अब साहस के साथ सामने आना चाहिए जिनके मन और उद्देश्य में कहीं न कहीं कुछ बहुत ही प्रयोगधर्मी पनप रहा है । हम सब इस समाज की एक कडी हैं इसलिए ये बहुत जरूरी हो गया है कि हम अपना कल कैसा देखना चाहते हैं उसके लिए हमने आज से क्या और कितने प्रयास किए , विशेषकर गलतियों से सीखते हुए निरंतर उसमें सुधार की कोशिश । यहां मैं कभी कभी सोचता हूं कि पिछले सत्रह वर्षों में मैंने अदालतों की रफ़्तार को तो बढते देखा है मगर जाने क्यों मुकदमों के दबाव को पछाड नहीं पाता । 
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एक अदालत कर्मी के रूप में , कानून के एक विद्यार्थी के रूप में और निरंतर बदलती हुई न्यायिक व्यवस्थाओं के प्रत्यक्ष साक्षी होने के नाते हम और हमारे सहकर्मियों का अब ये एक दायित्व बन जाता है कि अब इस संस्थान को हम अपने अनुभव के आधार पर वो चुस्त व्यवस्था और प्रक्रियाएं सौंप के जाएं कि कल होकर आज से बीस या तीस साल बाद जब हम कार्यरत न हों तो लगे कि काश ये व्यवस्था उस समय ठीक होन शुरू की गई होती तो यकीनन ही आज हालात कुछ और होते । 

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न्यायालयों पर मुकदमों के बढते दबाव को हम अदालतकर्मी ही न सिर्फ़ बखूबी अपने कंधों पर महसूस करते हैं बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों के साथ गजब का सामंजस्य बनाते हुए जरा भी बैकफ़ुट पर नहीं जाते । हैरानी इस बात को लेकर होती है कि जब हम अपने दफ़्तर के दबाव और कार्यबोझ को एकदम संवेदनशीलता के साथ उठा पा रहे हैं तो फ़िर आखिर हमारी ये कर्मठता उस समय क्यों और कहां चली जाती है जब बात खुद हम पर आती है । कहीं कोई संगठनात्मक ईकाई नहीं ,कोई प्रतिनिधित्व नहीं , कल्याणकारी योजनाएं तो दूर , सहकर्मी गण आपसे में भी शायद ही कभी एकत्र होकर आज तक बुनियादे समस्याओं से लेकर सुधारों की संभावनाओं पर विमर्श कर पाए हों । 
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काम बहुत विस्तृत और समयबद्ध होकर किए जाने की अपेक्षा रखता है । हम और हमारे जैसे अन्य सभी सहकर्मी अपने अनुभवों को साझा करते हुए विभिन्न स्तरों पर इन सभी अलग अलग तरह की समस्याओं , प्रक्रियात्मक कठिनाइयों , प्रशासनिक कार्यवाहियों , कल्याणकारी योजनाओं और प्रतिस्पर्धी वातावरण को तैयार किए जाने जैसे अनेक क्षेत्रों के लिए कार्य कर सकते हैं । 
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मैं अपने पिछले कार्यालयीय अनुभव के आधार पर न्याय प्रशासन की प्रक्रियात्मक कार्यवाहियों को जितनी बारीकी से परख रहा हूं उतनी ही बारेकी से उन्हें समुचित रूप से दक्ष किए जा सकने के प्रयासों और प्रयोगों पर भी कार्य कर रहा हूं । छोटे छोटे कई भागों में बंटी हुई ये रिपोर्ट एक मेगा प्रोजेक्ट रिपोर्ट के रूप में सर्वोच्च स्तर तक विमर्श और आकलन हेतु प्रस्तुत की जा सके यही मेरा प्रयास होगा । 
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आगामी पोस्टों में मैं विस्तार से अपनी योजनाओं का खुलासा करूंगा .....और चाहूंगा कि न सिर्फ़ आम पाठक बल्कि सहकर्मी मित्र भी पढ कर न सिर्फ़ मार्गदर्शन करें बल्कि सुझाव व विचार भी दें ...साथ और स्नेह का आकांक्षी ............

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