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रविवार, 12 सितंबर 2010

दिल्ली का कचहरी का बदलता चेहरा .......

जैसा कि मैंने अपनी पूर्व में लिखी पोस्टों में बताया था कि दिल्ली की अदालतों, उनमें चल रही कार्यवाही प्रणालियों, कर्मचारियों के लुक, सभी तकनीकों को आधुनिक करने , उन्हें परिवर्तित करने पर बहुत सी योजनाएं एक साथ चलाई जा रही हैं आज मैं दिखाता हूं नई और पुरानी अदालत का स्वरूप :-


ये हुआ करती थीं ,पुरानी अदालतें



और ये नीचे हैं, अत्याधुनिक तकनीक , लेजर कैमरों , सीसीटीवी , वीडियोकांफ़्रेंसिंग, डौकेट सिस्टम , की स्टेटस सिस्टम और पूर्णतयावातुनुकुलित नई अदालत का चेहरा


ऐसा कई कारणों से किया जा रहा है । अदालत की छवि बदलने के लिए, वहां आने जाने वालों की सहूलियत , तथा बेहतर वातावरण से मुकदमों के निस्तारण के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना । अब ये तो वक्त ही बताएगा ,कि ..........अदालत के ये बदलते चेहरे .......आम आदमी के चेहरे पर कितना सुकून और मुस्कुराहट ला पाएंगे ....अन्यथा ये खूबसूरती भी बदसूरत ही साबित होगी ॥

4 टिप्‍पणियां:

  1. चेहरा नहीं भावना बदलने की जरूरत है जिससे न्याय की परिभाषा इंसानियत और सत्य के आधार पर लिखा जा सके ना की ताकत,सिफारिस और पैसों के बल पे ...

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  2. जब तक इन्साफ की देवी की आँखों से पट्टी नही उतरती ये चमक दमक किसी काम नही आयेगी। धन्यवाद इस जानकारी के लिये।

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  3. निर्मला कपिला जी की बात से सहमत हूँ

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