शनिवार, 18 अक्तूबर 2008

अदालत में गवाही देने से पहले - भाग दो

गवाहे देने के लिए अदालत गवाह को सम्मान या नोटिस भेजती है जिस पर उसका नाम, पता, अदालत का नाम जहाँ उसे उपस्थित होना है आदि सब कुछ लिखा होता है। गवाह को चाहिए की वह उस नोटिस को संभाल कर रखे और गवाही वाले दिन साथ लाये। यदि हो सके तो उसकी एक फोटो कोपी करवा कर घर पर रख ले। यदि १६१ सी आर पी से के तहत बयान जो पुलिस ने पहले दर्ज किए हों , उसकी कोई कोपी है तो उसे पढ़ कर जाएँ अन्यथा गवाही के दिन से पहले अदालत में जाकर अभियोजन पक्ष के वकील यानि सरकारी वकील से प्रार्थना कर वह पूर्व में दिया हुआ बयान पढ़ सकता है। अक्सर गवाही और घटना के समय के बीच इतना लंबा अन्तराल हो जाता है की वह काफी बातें भूल जाता है इसलिए १६१ का बयान उसकी सहायता करता है। हाँ सबसे महत्वपूर्ण बात ये की यदि गवाही का सम्मान प्राप्त होने के बावजूद वह अदालत में उपस्थित होने की स्थिति में नहीं है तो उसे लिखित में ये सूचना अदालत में किसी के द्वारा पहुंचानी होगी अन्यथा उसके ख़िलाफ़ वारण जारी हो जायेंगे।

गवाही वाले दिन समय पर अदालत में उपस्थित होकर सबसे पहले अपनी हाजिरी लगवाएं ताकि अदालत को सूचना हो जाए की आप गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित हैं। अपनी बारी आने पर गवाही दे के लिए आगे आयें। यहाँ ये याद रहे की किस भी कारण से यदि आप उस दिन गवाही देने की स्थिति में नहीं हैं तो अगली तारीख देने की प्रार्थना कर सकते हैं। मगर सिर्फ़ एक या दो बार। पूछे गए प्रश्न को ठीक से समझने के बाद ही उत्तर दें। सिर्फ़ उतना ही बताएं जितना आवश्यक हो। यदि प्रश्न समझ में नहीं आ रहा है तो आप सरकारी वकील या स्वाम न्यायाधीश से समझाने का आग्रह कर सकते हैं। गवाही के उपरांत उसकी एक कोपी लेने की प्रार्थना भी आप कर सकते हैं, और अदालत निःशुल्क उपलब्ध करायेगी। यदि गवाही पूरी नहीं हुई है और अगली तारीख मिल गयी है तो उसे अच्छी तरह नोट कर लें। गवाही के उपरांत उसके नीचे अपने हस्त्याख्सर करना ना भूलें। गवाही ख़त्म होने के उपरांत अपना दैनिक निर्वाह खर्चा लेना न भूलें। आप जितनी बार भी अदालत में आए हैं आऔर अदालत ने आपको गवाही के लिए बुलाया है सरकार की तरफ़ से आपको निर्वाह बता दिया जायेगा। यदि ट्रेन, बस, आदि से आए हैं तो उसका टिकट संभालकर रखें। दीवानी मुकदमों में गवाह को खर्चा भी वही पक्ष देता है जिसकी तरफ़ से वह गवाही देने आया है।

अक्सर लोगों को ये जानकारी नहीं होती है की ऐसा कोई खर्चा दिया जाता है। इसलिए उन लोगों को ये बहुत अखरता है जिन्हें गवाही के लिए बार बार अदालत में आना पड़ता है। गवाही देने के बाद अपने दिए गए बयानों के नीचे हस्ताक्षर करना आवश्यक होता है। यदि भूलवश ये रह गया है तो आपको दोबारा बुलाया जा सकता है।
इन सारी बातों को ध्यान में रख कर यदि आप गवाही देने के लिए मानसिक रूओप से तैयार हो जाते हैं तो ये निसंदेह आपके लिए भी फायदेमंद होगा और अदालत के लिए भी। यदि इससे सम्बंधित कोई भी प्रश्न आपके मन में हो तो पूछ सकते हैं।

मेरे अगले अंकों में पढ़ें :- तलाक प्रक्रिया, मोटर वाहन दुर्घटना क्लेम, सूचना का अधिकार, पली बारगेनिंग, लोक अदालत आदि.

3 टिप्‍पणियां:

  1. आप अदालतों की सामान्य प्रक्रिया की जानकारी दे कर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हाँ एक बात और जोड़ना चाहूंगा कि स्टेशनरी की कमी के कारण आजकल समन एक ही प्रति में भेजे जा रहे हैं। जिन्हें पुलिस वाले वापस ले जाते हैं इस कारण से अदालत का नाम मुकदमा नं., तारीख और मुकदमें का शीर्षक नोट कर लेना बहुत जरूरी है।

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  2. बहुत काम की जानकारी दी है. अब आप और दिनेश जी के दो दो ब्लॉग हो गये, खूब जानकारियाँ आयेंगी. दिनेश जी के इतने लम्बे अनुभव का लाभ तो खैर मिलेगा ही.

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  3. aap dono ka dhanyavaad. aur haan udan tashtaree jee, main to ek sarkaaree sewak hoon kaam to har haal mein dinesh jee hee aayenge.

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