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रविवार, 5 जून 2011

कैदी भी करेंगे अब हैलो हैलो





राजधानी दिल्ली का केंद्रीय कारागार , यानि तिहाड कारागार , अपने प्रयोगों और सुधारों के कारण हमेशा ही चर्चा का केंद्र रहा है । मैंने आपको इस पोस्ट में बताया था कि कैसे जिला अदालत में , तिहाड के सजायाफ़्ता मुजरिमों द्वारा बनाए गई वस्तुओं की बिक्री के लिए राजधानी की एक जिला अदालत , कडकडूमा कोर्ट में बाकायदा एक आऊट्लेट भी खोला गया है । अब तिहाड से एक नया समाचार ये मिला है कि तिहाड प्रशासन ने तिहाड में बंद कैदियों को फ़ोन की सुविधा देने के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए हैं । 


महानिदेशक कारागार (दिल्ली ) के कार्यालय द्वारा जारी एक आदेश में इस पूरी योजना को विस्तार देते हुए कैदियों को फ़ोन सुविधा देने की पूरी व्यवस्था को सिलसिलेवार बताया गया है । इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं 


टेलीफ़ोन की सुविधा सिर्फ़ भारतीय कैदियों को , सप्ताह में दो दिन , और वो भी पांच मिनट की अवधि के लिए दी जाएगी । ये सुविधा सिर्फ़ उन कैदियों को दी जाएगी जिनका चाल चलन और व्यवहार जेल में अच्छा होगा । इस सुविधा को उस स्थिति में तात्कालिक या स्थाई रूप से वापस भी लिया जा सकता है , विशेषकर उस परिस्थिति में जब कोई कैदी जेल के अंदर या बाहर जेल कानून को तोडने का प्रयास करेगा । साथी कैदियों के साथ मारपीट, उनपर हमला आदि करने वाले कैदियों को ये सुविधा नहीं दी जाएगी । अलबत्ता जेल अधीक्षक को ये अधिकार होगा वो हर मामले में अलग से अपना निर्णय ले सके । 


जब भी कोई नया कैदी तिहाड जेल में लाया जाएगा , उसके फ़िंगर प्रिंट को स्कैन करके रिकॉर्ड में रख लिया जाएगा । कैदियों को  दो टेलिफ़ोन नंबर , जिन पर वह बात करने का इच्छुक होगा , देने को कहा जाएगा । जब भी किसी कैदी को फ़ोन करना होगा वह ,फ़ोन बूथ के पास आकर अपने उंगलियों को बायोमेट्रिक मशीन पर रख कर अपनी पहचान देगा । इसके उपरांत टच स्क्रीन सिस्टम से जुडी हुई मशीन , उस कैदी की पहचान करके , उसके द्वारा दिए गए दोनों नंबर वहीं स्क्रीन पर दिखाएगी , कैदी उसे छूकर टेलिफ़ोन नंबर डायल करके बात कर सकेंगे । सिस्टम में कॉल को रिडायल करने व बीच में ही काटने की भी व्यवस्था रखी गई है । जेल प्रशासन , टेलिफ़ोन बातचीत का पूरा रिकॉर्ड अपने पास रखेगा । कंप्यूटर सिस्टम , कैदी की बातचीत की समय सीमा को भी पूरी तरह ध्यान में रखते हुए पांच मिनट की समय सीमा के खत्म होने से पहले उसे आगाह करेगा और फ़िर निर्धारित समय के बाद अपने आप ही फ़ोन कट जाएगा । 


इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कैदियों को समान रूप से १००/- रुपया  प्रति माह स्थानीय कॉल्स के लिए और २००/- रुपया प्रतिमाह एसटीडी कॉल के लिए जमा कराना होगा । वे कैदी जिन पर राष्ट्रद्रोह , आतंकी गतिविधियों में लिप्तता , मकोका , नेशनल सिक्युरिटी एक्ट के साथ ही संगीन जुर्म जैसे डकैती , लूटमार , अपहरण , फ़िरौती  आदि जैसे  अपराधों में शामिल होने का आरोप होगा सामन्यतया उन्हें इस सुविधा से बाहर रखा गया है । किंतु उनके पास ये सुविधा होगी कि वे एक लिखित प्रार्थनापत्र जेल अधीक्षक के सामने प्रस्तुत करें और हरेक कैदी की प्रार्थना पर उसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए , उसे सिर्फ़ अपने परिवार या रिश्तेदार से बातचीत करने की अनुमति दी जाएगी न कि अपने किसी साथी से । जेल अधीक्षक इस पूरी बातचीत को सुन कर सुनिश्चित करेंगे कि जिससे बात की जा रही है वो वही व्यक्ति है जिसे कॉल की गई है । जब भी कोई कैदी , किसी विदेशी भाषा में बात करेगा (अंग्रेजी को छोडकर ) तो उसे अनुवादित कर लिया जाएगा । 


देखना है कि , अपनों से बातचीत करवाने की जेल प्रशासन की ये नई पहल कैदियों को समाज की मुख्य धारा में लौटने के लिए कितना प्रेरित कर पाती है । 



3 टिप्‍पणियां:

  1. दो ऑंखें बारह हाथ फिल्म की याद आ रही है भगवान करे प्रयोग सफल रहे |

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  2. आजकल तिहाड़ में नेता बहुत बंद हैं । जहाँ नेता बंद होते हैं । वहाँ नाजायज़ चीज़ों की सुविधा को जायज़ तरीक़े से देने की क़वायद है यह ।

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  3. आपकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता डा साहब

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