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शनिवार, 31 अगस्त 2019

अब घर बैठे प्राप्त करें अपने मुकदमे की जानकारी




अगर आपका कोई भी मुकदमा/वाद अदालत में लंबित है तो आप अब उसकी जानकारी घर बैठे ही अपने कंप्यूटर या मोबाईल से प्राप्त कर सकते हैं | तकनीक के साथ हाथ मिलाते हुए न्यायालय प्रशासन ने इसके लिए बहुत सारे उपाय किए हैं | बहुत सारे नए एप्स व मोबाईल सेवा का उपयोग करके न सिर्फ मुक़दमे बल्कि अदालतों की ,न्ययाधीशों की ,वाद सूची ,फैसले आदेश आदि की पूरी जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं | संक्षेप में इस चित्र के माध्यम से बताया गया है | विस्तार से जानने व पढ़ने के लिए जुड़े रहें और किसी भी शंका सलाह सुझाव के लिए प्रश्न करते रहें 


रविवार, 29 दिसंबर 2013

नई तकनीकों से लैस होता कडकडडूमा कोर्ट




कडकडडूमा न्यायालय परिसर का प्रवेश द्वार


दिल्ली की सभी पांच जिला अदालत परिसरों में से कडकडडूमा न्यायालय , जिसमें वर्तमान में दिल्ली के तीन जिलों , पूर्वी , उत्तरपूर्वी और शाहदरा जिला , की अधीनस्थ अदालतें काम कर रही हैं , का विकास शुरू से ही एक आदर्श कोर्ट परिसर की तरह किया गया है । बहुत से नए प्रयोगों व शुरूआत के लिए न्यायिक सुधारों के इतिहास में पहले से ही अपनी ख्याति का परचम लहरा रहे इस न्यायालय परिसर में , देश का पहला ई कोर्ट , देश का पहला संवेदनशील गवाह कक्ष एवं परिसर , हरित न्यायालय परिसर आदि के अलावा यहां सांध्यकालीन अदालतें , नियमित लोक अदालतें , मध्यस्थता केंद्र , विधिक सेवा प्राधिकरण , दिल्ली न्यायिक अकादमी , ई कोर्ट शुल्क वितरण केंद्र , सुविधा एवं सूचना केंद्र जैसे अनेक प्रयास लगातार किए जा रहे हैं । अब इनका परिणाम भी दिखने लगा है ।


हाल ही में ऐसे कुछ और प्रयासों की शुरूआत की गई है । अदालत भवन के प्रवेश द्वार प्रांगण में स्थित "सुविधा एवं सूचना केंद्र" में अधिवक्ताओं व आम लोगों के लिए विभिन्न प्रयोजनों हेतु बनाई गई खिडकियां (काउंटर्स) को माइक एवं स्पीकर से जोडा गया है । वास्तव में इन खिडकियों में बाहर की तरह कतारों में खडे लोगों को भीतर बैठे कर्मचारी द्वारा कही गई या बताई गई कोई बात अथवा जानकारी सुनने में काफ़ी परेशानी होती थी । चूंकि इस तरह की बारह खिडकियां बिल्कुल साथ साथ होने के कारण सुनने में काफ़ी असुविधा होती थी । इस समस्या को दूर करने के लिए सभी बारह खिडकियों पर उच्च तकनीक वाले माइक तथा स्पीकर लगा दिए गए हैं जिससे अब आम लोगों व अधिवक्ताओं को आसानी से सुना व कहा जा सकता है । ज्ञात हो कि प्रवेश द्वार के साथ ही बनी हुई खिडकी संख्या दो "पूछताछ एवं सहायता खिडकी" है जहां से न सिर्फ़ अदालत में चल रहे किसी भी वाद , उसके पक्ष , तारीख आदि के बारे में जानकरी दी जाती है बल्कि अन्य सभी जानकारियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं ।


इसके अलावा बहुत समय से प्रतीक्षित योजना "केस स्टेटस कंप्यूटर नोटिस बोर्ड" को भी हाल ही में स्थापित किया गया है । अदालत भवन में प्रवेश करते ही एक बडा कंप्यूटर नोटिस बोर्ड आम लोगों को दिखाई देगा ये कुछ इस तरह का जैसा आपने रेलवे स्टेशनों पर गाडियों की आवक जावक की सूचना हेतु लगा  देखा होगा । इस बोर्ड पर सभी अदालतों की कक्ष संख्या , उसके आगे उस समय उस अदालत में चल रही वाद संख्या एवं पक्षों का नाम प्रदर्शित होते हुए देखा जा सकेगा । वास्तव में इस कंप्यूटर बोर्ड को अदालत कक्षों में न्यायाधीश महोदय के साथ बैठे रीडर(पेशकार) के कंप्यूटर के साथ जोड दिया गया है ,किसी वाद की संख्या और पक्ष का नाम वहां टंकित करते ही इस सूचना बोर्ड पर वह प्रदर्शित होने लगेगा । ज्ञात हो कि कडकडडूमा अदालत परिसर में तीन जिला अदालतों के अधीन लगभग सौ अदालतें काम करती हैं जो पांच ब्लॉकों में विभाजित हैं । ऐसी ही एक सूचना पट्टिका अधिवक्ता चैंबर ब्लॉक्स में भी स्थापित कर दी जाएगी । इसका लाभ ये होगा कि अधिवक्ताओं सहित आम लोगों को भी इस बोर्ड पर प्रदर्शित सूचना से पता चल जाएगा कि अमुक अदालत में अभी अमुक संख्या के वाद की सुनवाई हो रही है । ज्ञात हो कि दिल्ली उच्च न्यायालय में ये व्यवस्था पहले से ही है ।


इसके अलावा भविष्य में अदालतों में आने वाली भीड और उसके कारण सुरक्षा व्यवस्था पर बढते हुए दबाव , गवाहों के साथ मारपीट की घटनाओं आदि को ध्यान में रखते हुए , मुख्य प्रवेश द्वार पर ही आम व्यक्तियों के लिए पास की व्यवस्था की शुरूआत की जाने वाली है । इससे यह लाभ होगा कि अनावश्यक ही अदालतों में भीड बढाने वाली संख्या को संतुलित एवं नियंत्रित किया जा सकेगा । उम्मीद है कि नित निरंतर प्रयोगों की इस रफ़्तार के साथ ही लोगों को त्वरित न्याय मिलने की रफ़्तार में भी तेज़ी आएगी


अगली पोस्ट :- फ़ैसलों और अदालत का वर्ष -2013

रविवार, 28 जून 2009

ग्रीष्मकालीन अवकाश और अदालतें

इन दिनों में ज्यादातर अदालतों में ग्रीष्मकालीन अवकाश का समय है..आम तौर पर जून के महीने में अदालतें ग्रीष्मकालीन अवकाश के लिए छुट्टी पर होती हैं...इसके अलावा दिल्ली समेत और भी कई राज्यों में शीतकालीन अवकाश भी दिया jaataa है..

जो लोग अक्सर ख़बरों में पढ़ते हैं की अदालतों में पहले से ही इतने ढेर सारे मुकदमें लंबित हैं तो फिर इन अवकाशों को क्यूँ नहीं समाप्त कर देना चाहिए..इस आलेख के माध्यम से मेरी कोशिश होगी की कुछ बातें जो आम तौर पर लोगों को पता नहीं होती , वो आप सबके सामने राखी जाए ताकि कुछ भ्रांतियां दूर हो सकें.

सबसे पहले बातें करते हैं ..अवकाशों के औचित्य की ..वो भी ऐसे समय में जब लंबित मुकदमों की संख्या करोडों का संखा छू रही है.. मोटे तौर पर तो लगता है की ..बिलकुल ..बल्कि सारी छुट्टियां समाप्त कर दी जानी चाहिए..मगर ये बात ध्यान में रखने वाली होती है की न्यायालयों और विशेषकर न्यायाधीशों का कार्य, कार्यप्रणाली,, अन्य किसी भी कार्य से सर्वथा भिन्न है. किसी भी अन्य कार्य,व्यवसाय या और किसी उद्यम में ,,किसी को निरंतर उतना मानसिक श्रम नहीं करना पड़ता..., नहीं मेरा मतलब है उस विशिष्ट रूप में नहीं करना पड़ता..एक एक मुकदमा किसी के जीवन मरण से सम्बंधित होता है..इसलिए लगातार मानसिक श्रम से थोडा सा अवकाश देकर उन्हें फिर से खुद को नवीन और स्फूर्त करने के लिए ही अवकाश की अव्धाराना को जीवित रकाहा गया है..

और ऐसा भी नहीं है की इन अवकाशों में सभी लोग पूर्ण तालाबंदी करके आराम फरमाते हैं..बल्कि पिछले कुछ वर्षों में तो अवकाश में अदालतों में इतने अलग अलग कार्यों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है की अवकाश की तो सार्थकता ही बन जाती हैं..दिल्ली की अदालतों में जहां पिछले कुछ वर्षों से अवकाशों में न्यायाधीशों को विशेष रूप से अभिलेखागार में पुराने वादों के रीकोर्डों की जांच करके ..जिनकी जरूरत नहीं होती उन्हें ..वहाँ से हटा कर ख़त्म करवाने का कार्य दिया जा रहा है. इसके अलावा उन्हें विशेष आदेश दिया जाता है की , वे अपनी अदालतों में वरिष्ठ नागरिकों के ,,महिलाओं के,, तथा बहुत पुराने मुकदमों
आदि को निपटाने का काम दिया जाता है..दरअसल ग्रीष्म कालीन अवकाश में सभी न्यायाधीश एवं कर्म्चारीगन बीच के अनुसार अवकाश पर जाते हैं....इसके अलावा विभागीय जांच , तथा और भी कई जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं. इनसे अलग मध्यस्थता केंद्र , लोक अदालतें ,तथा सांध्यकालीन अदालतें..भी नियमित रूप से लगाईं जाती हैं.

जहां तक ,,कर्मचारियों की बात है ..तो वे भी इन दिनों अदालतों में तेजी से चल रही कम्प्यूटरीकरण के कार्य को अपने अंतिम मुकाम देने में लगे हैं..यानि कुल मिला कर छुट्टी का उपयोग किया जा रहा है.हालांकि इस बात की भी आवाजें उठ रही हैं की छुट्टियों को पूर्णतया ख़त्म करके अदालतों को निर्बाध चलने दिया जाए..कम से कम निचली अदालतों को तो अवश्य ही ...जो एक हद तक सही भी लगता है..