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मंगलवार, 10 सितंबर 2013

देश के पहले "संवेदनशील गवाह परिसर " की शुरूआत






इन दिनों मेरी नियुक्ति , दिल्ली की पूर्वी ,उत्तर-पूर्वी व शाहदरा जिले की संयुक्त जिला अदालत परिसर , कडकडडूमा कोर्ट में है । दिल्ली में वर्तमान में कार्यरत पांच जिला अदालत परिसरों , तीस हज़ारी न्यायालय , पटियाला हाऊस न्यायालय , रोहिणी न्यायालय , साकेत न्यायालय एवं कडकडडूमा न्यायालय में , कडकडडूमा न्यायालय परिसर को ये गौरव प्राप्त है कि इसका विकास एक आदर्श न्याय परिसर के रूप में हुआ और किया जा रहा है ।



1993 में जब इस न्याय परिसर की स्थापना हुई थी तब से लेकर अपने आज तक के सफ़र में इस न्यायपरिसर को एक आदर्श न्यायायालय परिसर के रूप में विकसित किए जाने के अथक प्रयास अब भी जारी हैं । देश की दूसरी और राज्य की पहली न्यायिक अकादमी की स्थापना , देश के पहले ई न्यायालय की स्थापना , हरित न्याय परिसर की स्थापना , बाल गवाह न्यायालय की स्थापना , के साथ ही मध्यस्थता केंद्र , सुविधा एवं सूचना केंद्र , विधिक सहायता प्राधिकरण की स्थापना , स्थाई लोक अदालतों की स्थापना , सांध्य कालीन अदालतों की स्थापना जैसे जाने कितने ही नवीन न्यायिक प्रयोंगों को शुरू किए जाने के लिए विख्यात हुए इस न्यायालय परिसर ने इतने ही कम समय में देश की विधिक परिसरों में एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है ।


एक बार फ़िर एक अदभुत और नए प्रयोग के लिए तैयार इस न्यायालय परिसर में , कल यानि ११ सितंबर २०१३ को शाम पांच बजे ,माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय देश के पहले "संवेदनशील गवाह परिसर " की शुरूआत करने जा रहे हैं । यह परिसर न्यायालय भवन के सबसे ऊपरी तल यानि सातवें तल पर स्थापित किया गया है । "संवेदनशील न्याय परिसर "  की संकल्पना , माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने चर्चित बेस्ट बेकरी कांड में दी थी और गवाहों की सुरक्षा पर सरकार का ध्यान खींचा था । इसके साथ ही इसके तुरंत बाद , जेसिका लाल हत्याकांड के दो अहम गवाहों ,श्याम मुंशी  और प्रेम सागर मिनोचा के मुकरने और इस पर संज्ञान लेकर उन दोनों गवाहों पर मुकदमा दर्ज़ किए जाने के निर्देश देते समय दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को गवाहों की समुचित सुरक्षा हेतु नई कार्ययोजना पर काम करने का निर्देश जारी किया था ।


माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिल्ली , ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक समिति बनाई जिसने "संवेदनशील गवाह परिसर" की स्थापना में अहम भूमिका निभाई । इस गवाह कक्ष की कुछ विशेषताओं में एक सबसे बडी और खास ये है कि इसमें गवाह कक्ष और न्याय कक्ष के बीच एक लंबी ऐसा पारदर्शी आईने सरीखी दीवार होती है जहां से गवाह तो आरोपी का सामना किए बिना और उससे बिना डर अपनी गवाही दर्ज़ करा सकता है । अवयस्क गवाह , बालिकाओं , युवतियों , , महिलाओं , विशेषकर शोषण के मुकदमों में जहां कि आरोपियों से आमना सामना उनकी मनोस्थिति पर प्रभाव डालता है वहां इस तरह की गवाही प्रक्रिया नि;संदेह बहुत प्रभावी साबित होगी । इसके अलावा वीडियो कांफ़्रेंसिग के जरिए भी गवाही कराने का पूरा इंतज़ाम रखा गया है । ज्ञात हो कि न्यायिक क्षेत्र में नई तकनीकों का उपयोग त्वरित व अचूक न्याय के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए किए जाने की शुरूआत पिछले एक दशक में ही हुई और इसके क्रांतिकारी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं । उम्मीद की जानी चाहिए कि न्यायिक क्षेत्र में ऐसे अभिनव प्रयोग अपने दूरगामी प्रभाव छोडने में सफ़ल होंगे ।  

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

दिल्ली की जिला अदालतों में बायोमेट्रिक प्रणाली लागू










पूर्वी एवं उत्तर पूर्वी जिला अदालत ,कडकडडूमा न्यायालय ,दिल्ली





राजधानी दिल्ली की जिला अदालतों के प्रशासनिक सुधारों की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत एक और उपलब्धि जुडने जा रही है । दिल्ली की सभी जिला अदालतों में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज़ करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लागू किया जा रहा है । 

ज्ञात हो कि , दिल्ली उच्च न्यायालय में ये व्यवस्था पहले से ही लागू है और पिछले दिनों दिल्ली नगर निगम के दफ़्तर में भी , काफ़ी वाद विवाद के बाद इसे लागू कर दिया  गया । राजधानी की सभी जिला अदालतों के कर्मचारियों को पिछले दिनों माईक्रो चिप लगे हुए नए पहचान पर ज़ारी किए गए हैं । इस माईक्रो चिप लगे पहचान पत्र को बायोमेट्रिक उपस्थिति पत्र के पास ले जाने पर कर्मचारी/अधिकारी का नाम स्वत: ही स्क्रीन पर दिखाई देता । इसके पश्चात कर्मचारी /अधिकारी जैसे ही अपनी फ़िंगर प्रिंट मैच कराएंगे ,उनकी हाज़िरी समय के साथ दर्ज़ हो जाएगी । अदालतों में वर्दी लागू करने का कार्य पहले से ही लागू किया जा चुका है ।


न्यायव्यवस्था में ई प्रणाली के उपयोग को अपनाते हुए अदालतें पहले ही वीडियो कांफ़्रेंसिग ,ई कोर्ट जैसी परिकल्पनाओं पर सफ़लतापूर्वक काम कर रही हैं । अदालतों के सभी रिकार्डों को तेज़ी से अंतरजाल पर सहेजने का कार्य चल रहा है । उम्मीद की जा रही है कि अदालतों पर तेज़ गति से बढते मुकदमों के बोझ से निपटने के लिए अदालत हर स्तर पर खुद को तैयार कर रही हैं 

शनिवार, 21 मई 2011

राजधानी दिल्ली में बनी हरित अदालत



पर्यावरण संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों में न्यायपालिका ने भी अपनी सहभागिता देने की योजना बनाई है । हाल ही में राजधानी दिल्ली में , पूर्वी और उत्तर पूर्वी जिलों की अधीनस्थ अदालत , कडकडडूमा कोर्ट की पर्यावरण समिति के नोडल ऑफ़िसर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री गुरदीप सिंह ने  कडकडूमा कोर्ट को "हरित न्यायालय " घोषित करते हुए,
एक परिपत्र जारी करते हुए निर्देश दिया है कि न्यायालय परिसर में अनावश्यक रूप से जलाई जा रही लाइटें पंखे इत्यादि को बंद रखा जाए , विशेष रूप से वहां जहां पर्याप्त धूप व रोशनी पहुंचती हो । 


इसके साथ ही निर्देश जारी किया गया है कि जब न्यायाधीश न्यायालय में बैठे हों तो उनके चैंबरों की लाईटें , पंखें व एसी को बंद रखा जाए । अनावश्यक खर हो रही बिजली को बचा कर कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने को कहा गया है । ज्ञात हो कि अभी हाल ही में कडकडडूमा न्यायालय परिसर में स्थित सरकारी आवास परिसर में भी पौधा रोपण की एक बडी योजना का शुभारंभ किया गया है । कडकडडूमा न्यायालय परिसर में भी बडे वृक्षों , और पौधों की भरमार के कारण भी इसे "हरित अदालत " का दर्ज़ा दिया गया है । दिल्ली पी डब्ल्यू डी की एक नर्सरी अदालत परिसर के भीतर ही इस हरित अदालत के स्वपन को बखूबी साकार कर रही है । ये कदम न सिर्फ़ मानवीय बल्कि पर्यावरण सचेतता के पक्ष में एक मील का पत्थर साबित होगा ।  




कोर्ट परिसर में फ़ैली हुई हरियाली .....