
पिछले दिनों वकालत से जुडी कुछ घटनाएं एक के बाद एक ऐसी घटती चली गयी, की उन्होंने मुझे मजबूर कर दिया की मैं सोंचू की आख़िर कभी समाज का अगुवा बना एक विशिष्ट और प्रबुद्ध वर्ग में आख़िर ऐसा क्या आ गया की आज स्थिति ऐसी बन गयी है, और तो और राजधानी की अदालतों में पिछले कुछ महिनू में नकली वकीलों की घटना ने तो सकते में डाल दिया है ।
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