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सोमवार, 7 मई 2012

कोर्ट में भी -सत्यमेव जयते


भारत का राष्ट्रीय चिह्न

इधर चारों तरफ़ सिने अभिनेता आमिर खान के नए टीवी शो सत्यमेव जयते की चर्चा थी तो इसी बीच दिल्ली की जिला अदालतों में जारी किया गया एक निर्देश का विषय भी यही था - सत्यमेव जयते । जी नहीं इस सत्यमेव जयते का संबंध सीधे सीधे राष्ट्रीय चिह्न के प्रयोग व उपयोग से था ।

अशोक चिह्न

अशोक चिह्न भारत का राजकीय प्रतीक है। इसको सारनाथ में मिली अशोक लाट से लिया गया है। मूल रूप इसमें चार शेर हैं जो चारों दिशाओं की ओर मुंह किए खड़े हैं। इसके नीचे एक गोल आधार है जिस पर एक हाथी के एक दौड़ता घोड़ा, एक सांड़ और एक सिंह बने हैं। ये गोलाकार आधार खिले हुए उल्टे लटके कमल के रूप में है। हर पशु के बीच में एक धर्म चक्र बना हुआ है। राष्‍ट्र के प्रतीक में जिसे २६ जनवरी १९५० में भारत सरकार द्वारा अपनाया गया था केवल तीन सिंह दिखाई देते हैं और चौथा छिपा हुआ है, दिखाई नहीं देता है। चक्र केंद्र में दिखाई देता है, सांड दाहिनी ओर और घोड़ा बायीं ओर और अन्‍य चक्र की बाहरी रेखा बिल्‍कुल दाहिने और बाई छोर पर। घंटी के आकार का कमल छोड दिया जाता है। प्रतीक के नीचे सत्यमेव जयते देवनागरी लिपि में अंकित है। शब्‍द सत्‍यमेव जयते शब्द मुंडकोपनिषद से लिए गए हैं, जिसका अर्थ है केवल सच्‍चाई की विजय होती है।




दिल्ली प्रशासन ने पिछले दिनों पाया कि , अदालत सहित अन्य बहुत सारे सार्वजनिक व सरकारी संस्थानों में जहां भी राष्ट्रीय चिह्न का उपयोग किया जा रहा है वहां एक भूल आमतौर पर देखने सुनने को मिल रही है । और वो है इस राष्ट्रीय चिह्न के नीचे देवनागिरी में लिखा सत्यमेव जयते , यानि सत्य की जीत होती है । अभी कुछ समय पहले सभी विभागों एवं अदालत प्रशासन को निर्देश जारी किए गए थे कि वे सुनिश्चित करें कि जहां कहीं भी राष्ट्रीय चिह्न का प्रयोग या उपयोग किया जा रहा हो वहां अनिवार्य रूप से सत्यमेव जयते भी लिखा होना चाहिए ।

अब नए निर्देशों के मुताबिक सबसे ये पूछा गया है कि , नए निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए कौन कौन से कदम उठाए गए हैं व इस विषय पर वर्तमान स्थिति क्या है । ज्ञात हो कि अदालतों में अदालत कर्मियों को दिए गए नए बायोमैट्रिक पहचान पत्र में अंकित राष्ट्रीय चिह्न में सत्यमेव जयते उपस्थित है । अन्य सभी संभावित स्थानों पर भी इसकी सुनिश्चितता तय की जा रही है । समाज से अदालत तक आज का दिन सत्यमेव जयते के नाम रहा ।

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